NKKS

✍️ कोरी समाज और जातीय पहचान की चुनौती

कोरी समाज और जातीय पहचान की चुनौती

जाति बदलने वाले युवाओं का बहिष्कार – कोरी समाज की इज्ज़त सबसे ऊपर
कोरी समाज जागो! नाम बदलने वालों को मत अपनाओ

कोरी समाज और जातीय पहचान की चुनौती

कोरी (कोलिया) समाज भारत की प्राचीन मेहनतकश जातियों में से एक है। इस समाज ने इतिहास में अपनी पहचान कपड़ा बुनने, वस्त्र निर्माण और श्रमप्रधान कार्यों से बनाई। इसी समाज में महापुरुष बुद्ध और संत कबीर जैसे दिव्य व्यक्तित्व जन्मे, जिन्होंने पूरी दुनिया को मानवता, समानता और सच्चाई का मार्ग दिखाया। इसलिए कोरी समाज अपनी परंपरा और गौरवशाली इतिहास पर गर्व करता है।

लेकिन आज की पीढ़ी में एक दुखद प्रवृत्ति दिखाई दे रही है कि कुछ युवा अनजाने में अपनी जातीय पहचान छोड़कर दूसरी जातियों के उपनाम का प्रयोग करने लगे हैं। यह केवल नाम बदलने की बात नहीं है, बल्कि इससे समाज के आरक्षण संबंधी अधिकार, सामाजिक प्रतिनिधित्व और राजनीतिक हिस्सेदारी पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

उदाहरण के लिए, कुछ लोग “जाटव” उपनाम लगाने लगे हैं। ऐतिहासिक दृष्टि से देखा जाए तो “जाटव” चमार क्लस्टर की उपजाति मानी जाती है, जिन्हें आगे चलकर रविदासिया के रूप में भी पहचाना गया। वे परंपरागत रूप से चमड़े के काम से जुड़े रहे। जबकि कोरी (कोलिया) समाज की पहचान कपड़ा बुनने और वस्त्र निर्माण से जुड़ी रही है। यानी, दोनों जातियों की सामाजिक और व्यावसायिक पृष्ठभूमि भिन्न है। इसलिए यह मानना कि कोरी और जाटव एक ही हैं, ऐतिहासिक और सामाजिक दोनों ही दृष्टि से गलत है।

जब कोई कोरी समाज का व्यक्ति अपने नाम के साथ जाटव या किसी अन्य जाति का उपनाम लगाता है, तो इससे समाज की भविष्य की पीढ़ियाँ भ्रमित हो सकती हैं। धीरे-धीरे कोरी नाम और उसकी ऐतिहासिक पहचान मिटने लगेगी। इससे आरक्षण का लाभ, जो कोरी समाज को संविधान ने दिया है, भी किसी अन्य जाति में समाहित हो सकता है। यही कारण है कि समाज के युवाओं को अपनी मूल पहचान—कोरी/कोलिया—पर गर्व करना चाहिए और उसी को आगे बढ़ाना चाहिए।

समाज तभी मजबूत होता है जब उसकी पहचान स्पष्ट और संगठित हो। अगर हम अपने असली नाम और वंश को छोड़ देंगे, तो आने वाली पीढ़ियों के सामने अंधकार खड़ा हो जाएगा।

⚖️ निष्कर्ष

कोरी और जाटव जातियाँ अलग-अलग हैं। दोनों की परंपरा और इतिहास भिन्न है। इसलिए कोरी समाज के युवाओं को चाहिए कि वे अपनी असली पहचान बनाए रखें और आने वाली पीढ़ियों तक इसे सुरक्षित पहुँचाएँ।

📌 नोट (Disclaimer)

हम इस लेख में किसी भी जाति, धर्म या समुदाय का विरोध नहीं कर रहे हैं। हमारा उद्देश्य केवल कोरी (कोलिया) समाज के युवाओं को जागरूक करना है ताकि वे अपनी वास्तविक पहचान और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा कर सकें।

Exit mobile version